कुरान - 9:79 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

79
ٱلَّذِينَ يَلۡمِزُونَ ٱلۡمُطَّوِّعِينَ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ فِي ٱلصَّدَقَٰتِ وَٱلَّذِينَ لَا يَجِدُونَ إِلَّا جُهۡدَهُمۡ فَيَسۡخَرُونَ مِنۡهُمۡ سَخِرَ ٱللَّهُ مِنۡهُمۡ وَلَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٌ,

Transliteration: (Allazeena yalmizoonal mut tawwi'eena minalmu'mineena fis sadaqaati wallazeena laa yajidoona illaa juhdahum fayaskharoona minhum sakhiral laahu minhum wa lahum azaabun aleem)

वे लोग जो रज़ाकारी से सदक़ा देने वाले मोमिनों पर ऐब लगाते हैं [216], और उन पर (भी) जो अपनी मेहनत के सिवा कुछ नहीं पाते [217], फिर वे उनका मज़ाक उड़ाते हैं [218]। अल्लाह उनका मज़ाक उड़ाने की सज़ा देगा, और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है [219]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 79 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 79 की तफ़्सीर

✅ [216] मुनाफ़िक़ों का सदक़े पर मज़ाक

यह आयत उस वक़्त नाज़िल हुई जब मुनाफ़िक़ों ने नबी ﷺ के नेक सहाबा का मज़ाक उड़ाया — जो बड़ी रक़में सदक़ा देते थे उन्हें रियाकार कहा गया, और जो कम देते थे उन्हें ताना मारा गया कि अल्लाह को तुम्हारे माल की ज़रूरत नहीं।

✅ [217] आज के नुक़्ताचीनों के लिए सबक़

यह उन आलोचकों (जैसे रफ़ज़ी) के लिए सबक़ है जो सहाबा की इबादत और सदक़े पर निफ़ाक़ का इल्ज़ाम लगाते हैं। ऐसा ऐब लगाना और ताना मारना मुनाफ़िक़ों का रवैया है।

✅ [218] तादाद से बढ़कर सच्ची नियत

हज़रत अबू अक़ील अन्सारी पूरी रात की मेहनत के बाद सिर्फ़ एक साअ (तक़रीबन 4 किलो) खजूर लाए, फिर भी नबी ﷺ ने उन्हें ख़ुशी से क़बूल किया। यह दिखाता है कि अल्लाह के नज़दीक सदक़े की तादाद से बढ़कर दिल की सच्चाई की क़द्र है।

✅ [219] मज़ाक का अल्लाही बदला

अल्लाह के नेक बंदों का मज़ाक उड़ाना, इल्ज़ाम लगाना या ताना मारना अल्लाह की ही मुख़ालिफ़त है, और अल्लाह ऐसा करने वालों को दर्दनाक अज़ाब देगा।

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