कुरान - 9:82 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

82
فَلۡيَضۡحَكُواْ قَلِيلٗا وَلۡيَبۡكُواْ كَثِيرٗا جَزَآءَۢ بِمَا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ,

Transliteration: (Falyadhakoo qaleelanw walyabkoo kaseeran jazaaa'an bimaa kaanoo yaksiboon)

तो वे थोड़ा हँस लें [228], और (आख़िर में) बहुत रोएँगे, उन कामों के बदले में जो वे करते रहे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 82 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 82 की तफ़्सीर

✅ [228] मोमिनों का मज़ाक उड़ाने के नतीजे

ये दोनों हुक्म ख़बर देने वाले हैं। मुनाफ़िक़ दुनिया में थोड़ा हँसेंगे, लेकिन आख़िरत में बहुत रोएँगे, क्योंकि मोमिनों की मुश्किल पर हँसना सख़्त गुनाह है।

जब मज़ाक दूसरों के दर्द पर हो, तो ख़ुशी का हुक्म कैसे हो सकता है? जहन्नम वाले हज़ारों साल रोएँगे — पहले आँसू बहाएँगे, फिर ख़ून, यहाँ तक कि उनकी आँखें बिलकुल सूख जाएँगी।

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