कुरान - 9:9 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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ٱشۡتَرَوۡاْ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ ثَمَنٗا قَلِيلٗا فَصَدُّواْ عَن سَبِيلِهِۦٓۚ إِنَّهُمۡ سَآءَ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ,

Transliteration: (Ishtaraw bi Aayaatil laahi samanan qaleelan fasaddoo 'an sabeelih; innahum saaa'a maa kaanoo ya'maloon)

उन्होंने अल्लाह की आयतों को थोड़ी सी क़ीमत [21] पर बेच दिया और (लोगों को) उसकी राह से रोका। बेशक वे बहुत बुरा करते रहे हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 9 की तफ़्सीर

✅ [21] हक़ पर लालच: दुनियावी फ़ायदे के लिए बेवफ़ाई

यह आयत उन लोगों की मज़म्मत करती है जिन्होंने दुनियावी माल हासिल करने के लिए इस्लाम ठुकराया और नबी ﷺ से किए हुए अहद तोड़ दिए। उनका रवैया दुनियावी लालच से चल रहा था, जैसा कि अबू सुफ़ियान की तमा का ज़िक्र है, जिसने उन्हें अपने समझौते छोड़ने पर उभारा।

"अल्लाह की आयतें" से मुराद या तो:

  • कुरआन की आयतें, जिन्हें उन्होंने ठुकराया और ग़लत इस्तेमाल किया, या
  • नबी ﷺ से किए गए अहद और समझौते, जिनकी शर्तें कुरआन के दीनी उसूलों पर क़ायम थीं।

अस्थायी फ़ायदे को हक़ पर तरजीह देकर और लोगों को इस्लाम क़बूल करने से रोककर उन्होंने बड़ा गुनाह किया। दीनी हिदायत को निजी फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करना ही वह काम है जिसे आयत सबसे बुरा काम कहती है।

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