कुरान - 43:86 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

86
وَلَا يَمۡلِكُ ٱلَّذِينَ يَدۡعُونَ مِن دُونِهِ ٱلشَّفَٰعَةَ إِلَّا مَن شَهِدَ بِٱلۡحَقِّ وَهُمۡ يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa laa yamlikul lazeena yad'oona min doonihish shafaa'ata illaa man shahida bilhaqqi wa hum ya'lamoon)

और जिन्हें ये लोग उसके सिवा पुकारते हैं, वे शफ़ाअत का कोई इख़्तियार नहीं रखते [149], सिवाए उनके जो हक़ की गवाही दें [150] और वे (हक़ को) जानते हों। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 86 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 86

"और जिन्हें ये लोग उसके सिवा पुकारते हैं, वे शफ़ाअत का कोई इख़्तियार नहीं रखते [149], सिवाए उनके जो हक़ की गवाही दें [150] और वे (हक़ को) जानते हों।"

[149] बुतों के पास शफ़ाअत का कोई इख़्तियार नहीं

काफ़िरों के तराशे हुए बुत और बातिल माबूद किसी की शफ़ाअत नहीं कर सकते। जहां तक हज़रत ईसा और हज़रत उज़ैर अलैहिमुस्सलाम का ताल्लुक़ है, उन्हें अल्लाह के इज़्न से शफ़ाअत का इज़्न हासिल है, लेकिन वे काफ़िरों के लिए शफ़ाअत नहीं करेंगे क्योंकि काफ़िर के लिए शफ़ाअत नहीं होती।

[150] हक़ की गवाही देने वाले (अंबिया व औलिया) की शफ़ाअत

जो लोग हक़ यानी तौहीद व रिसालत की गवाही देते हैं—जैसे अंबिया-ए-किराम, औलिया-ए-इज़ाम, शोहदा और उलमा-ए-हक़—उन्हें अल्लाह तआला अपने फ़ज़्ल से शफ़ाअत का मक़ाम और इख़्तियार अता फ़रमाएगा। शफ़ाअत की तफ़सीलात तफ़सीर-ए-नईमी में मुफ़स्सल बयान हुई हैं।

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