कुरान - 43:87 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

87
وَلَئِن سَأَلۡتَهُم مَّنۡ خَلَقَهُمۡ لَيَقُولُنَّ ٱللَّهُۖ فَأَنَّىٰ يُؤۡفَكُونَ

Transliteration: (Wa la'in sa altahum man khalaqahum la yaqoolun nallaahu fa annaa yu'fakoon)

और अगर आप उनसे पूछें कि उन्हें किसने पैदा किया, तो वे यक़ीनन कहेंगे: 'अल्लाह ने' [151]! फिर वे किधर बहके जाते हैं [152]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 87 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 87

"और अगर आप उनसे पूछें कि उन्हें किसने पैदा किया, तो वे यक़ीनन कहेंगे: 'अल्लाह ने' [151]! फिर वे किधर बहके जाते हैं [152]?"

[151] मुशरिकीन का ख़ालिक़ को तस्लीम करना

अरब के मुशरिक ख़ुद मानते थे कि उनका ख़ालिक़ सिर्फ़ अल्लाह है। लेकिन सिर्फ़ अल्लाह को ख़ालिक़ मानना ईमान के लिए काफ़ी नहीं जब तक कि हुज़ूर ﷺ की नबुव्वत को दिल से तस्लीम न किया जाए। इब्लीस भी अल्लाह के वजूद को मानता था मगर नबी के आगे न झुकने की वजह से काफ़िर हुआ।

[152] इक़रार के बावजूद गुमराही

जब वे ख़ालिक़ अल्लाह ही को मानते हैं, तो फिर बुतों की पूजा करके और नबी ﷺ का इन्कार करके किधर औंधे मुंह भटके जा रहे हैं?

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