कुरान - 43:88 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

88
وَقِيلِهِۦ يَٰرَبِّ إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ قَوۡمٞ لَّا يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Wa qeelihee yaa Rabbi inna haaa'ulaaa'i qawmul laa yu'minoon)

और रसूल के इस अर्ज़ करने की क़सम [153]: 'ऐ मेरे रब! बेशक ये वे लोग हैं जो ईमान नहीं लाते।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 88 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 88

"और रसूल के इस अर्ज़ करने की क़सम [153]: 'ऐ मेरे रब! बेशक ये वे लोग हैं जो ईमान नहीं लाते।'"

[153] महबूब ﷺ की फ़रियाद की इलाही अज़मत

अल्लाह तआला ने अपने महबूब नबी-ए-पाक ﷺ की मुबारक ज़बान से निकली हुई इस फ़रियाद की क़सम खाई। यह दिखाता है कि हुज़ूर ﷺ अल्लाह की बारगाह में कितने अज़ीम और प्यारे हैं कि आपकी हर अदा, आपकी गुफ़्तगू और आपकी फ़रियाद अल्लाह के नज़दीक क़सम के लाएक़ मुअज़्ज़ज़ है। यह आयत उम्मत के ईमान न लाने पर हुज़ूर ﷺ के क़ल्बी दर्द को भी उजागर करती है।

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