कुरान - 35:44 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
أَوَلَمۡ يَسِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَيَنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ وَكَانُوٓاْ أَشَدَّ مِنۡهُمۡ قُوَّةٗۚ وَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيُعۡجِزَهُۥ مِن شَيۡءٖ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَلَا فِي ٱلۡأَرۡضِۚ إِنَّهُۥ كَانَ عَلِيمٗا قَدِيرٗا

Transliteration: (Awalam yaseeroo fil ardi fa yanzuroo kaifa kaana ‘aaqibatul lazeena min Qablihim wa kaanoo ashadda minhum quwwah; wa maa kaanal laahu liyu’jizahoo min shai’in fis samaawaati wa laa fil ard; innahoo kaana ‘Aleeman Qadeeraa)

क्या उन्होंने ज़मीन में सैर नहीं की कि देखते कि उन लोगों का कैसा अंजाम हुआ [130] जो उनसे पहले थे, हालाँकि वे ताक़त में इनसे कहीं ज़्यादा सख़्त थे? और अल्लाह ऐसा नहीं कि आसमानों और ज़मीन में कोई चीज़ [131] उसके क़ाबू से बाहर जा सके [132]; बेशक वह सब कुछ जानने वाला, पूरी क़ुदरत रखने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 44

"क्या उन्होंने ज़मीन में सैर नहीं की कि देखते कि उन लोगों का कैसा अंजाम हुआ [130] जो उनसे पहले थे, हालाँकि वे ताक़त में इनसे कहीं ज़्यादा सख़्त थे? और अल्लाह ऐसा नहीं कि आसमानों और ज़मीन में कोई चीज़ [131] उसके क़ाबू से बाहर जा सके [132]; बेशक वह सब कुछ जानने वाला, पूरी क़ुदरत रखने वाला है।"

[130] तारीखी खंडरात की सैर और औलिया के मज़ामात से बरकत

यहाँ दो अज़ीम मस्अले साबित होते हैं:

  1. इबरत हासिल करने के लिए गुज़श्ता क़ौमों के खंडरात की सैर करना जायज़ और मुफ़ीद है। इसी तरह अल्लाह के नेक बंदों और औलिया-ए-किराम के मज़ामात और शहरों का सफ़र करना रहमत व बरकत हासिल करने का सबब है।
  2. मुक़द्दस मक़ामात और आसार की शोहरत व तवातुर ही उनकी सनद के लिए काफ़ी है; हर मक़ाम के लिए हदीस या आयत की नस होना लाज़िम नहीं। क़ुरआन ने मुशरिकों की तारीखी मालूमात को इबरत के लिए काफ़ी क़रार दिया।

[131] अज़ाब में ताख़ीर अल्लाह की हिकमत है, कमज़ोरी नहीं

काफ़िरों पर अज़ाब के आने में जो मोहलत मिलती है वह अल्लाह की किसी आजिज़ी की वजह से नहीं, बल्कि उसकी हिकमते बालिग़ा के तहत है।

[132] कायनात की हर चीज़ अल्लाह के मुकम्मल क़ाबू में है

आसमान और ज़मीन की कोई ताक़त अल्लाह के इहाता-ए-क़ुदरत से बाहर नहीं भाग सकती। वह हर चीज़ पर ग़ालिब और अलीम व क़दीर है।

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