Transliteration: (Laqad kaana li Saba-in fee maskanihim Aayatun jannataani 'any yameeninw wa shimaalin kuloo mir rizqi Rabbikum washkuroolah; baldatun taiyibatunw wa Rabbun Ghafoor)
"बेशक क़ौमे सबा के लिए [50] उनके रहने की जगह में एक निशानी थी—दो बाग़ात दायें और बायें। अपने रब का रिज़्क़ खाओ [52] और उसका शुक्र अदा करो। पाकीज़ा शहर है [53] और बख़्शने वाला रब है [54]।"
क़ौमे सबा अरब के क़हतानी क़बीलों में से सबा बिन यशजुब की औलाद थी। ये लोग यमन के शहर सनआ के क़रीब 'मआरिब' के इलाक़े में आबाद थे। यह क़ौम इन्तिहाई मुतमव्वल और तरक़्क़ी-याफ़्ता थी, और एक ज़माने में मल्लिका बिलक़ीस इनकी हुक्मरां थीं जिनका निकाह हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) से हुआ था। उनकी यह सरज़मीन कुदरते इलाही की अज़ीम निशानी थी।
अल्लाह ने उन्हें वादी के दोनों जानिब दायें और बायें दो वसीअ बाग़ात अता फ़रमाए थे जो फलों और नेमतों से लदे रहते थे। नेमतों की कसरत का यह आलम था कि अगर कोई शख़्स सर पर ख़ाली टोकरी रखकर बाग़ से गुज़रता, तो बाहर निकलते-निकलते टोकरी ख़ुद-ब-ख़ुद पके हुए फलों से भर जाती थी।
सबा का शहर इन्तिहाई साफ़, ख़ुशगवार और मोअतदिल था। वहाँ मच्छर, मक्खी, सांप और बिच्छू जैसे मूज़ी जानवर बिल्कुल नहीं थे, यहाँ तक कि अगर कोई बाहर से जुंएं लेकर भी दाख़िल होता तो शहर की पाकीज़ा आबो हवा से वे फ़ौरन ख़त्म हो जाती थीं। यह शहर ज़ाहिरी व बातिनी हुस्न का मुकम्मल नमूना था।
अल्लाह तआला ने उन्हें हुक्म फ़रमाया कि इन नेमतों का शुक्र अदा करें और उसकी इबादत करें, और याद रखें कि उनका रब बड़ा बख़्शने वाला (ग़फ़ूर) है जो तौबा करने वालों की ख़ताओं को माफ़ फ़रमाता है। मगर अफ़सोस कि इस क़ौम ने ना-शु Shukri की जिसका दर्दनाक अंजाम अगली आयात में बयान हुआ है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat