कुरान - 36:4 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
عَلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ

Transliteration: ('Alaa Siraatim Mustaqeem)

(जो) सीधी राह (सिराते मुस्तक़ीम) पर भेजे गए हैं [4]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 4

"(जो) सीधी राह पर भेजे गए हैं [4]!"

[4] सिराते मुस्तक़ीम और शैतानी मक्र से हिफ़ाज़त

हुज़ूर अकरम ﷺ जिस दीन और तरीक़े पर हैं, वही सिराते मुस्तक़ीम (सीधा रास्ता) है जो बंदे को सीधे अल्लाह की रज़ा और जन्नत तक पहुँचाता है।

क़ुरआन में शैतान का यह क़ौल ज़िक्र हुआ है: "मैं ज़रूर तेरे सीधे रास्ते पर उनके लिए बैठूँगा" (सूरह आराफ़)। यानी शैतान डाकू बनकर सिराते मुस्तक़ीम पर घात लगाए बैठा है ताकि ईमान वालों को लूटे। लेकिन अल्लाह तआला ने अपने करम से इसी रास्ते पर हुज़ूर ﷺ और आपके वारिस औलिया-ए-किराम को मुहाफ़िज़ बनाकर क़ायम फ़रमाया है।

जिस तरह डाकू के मुक़ाबले में पुलिस अफ़सर का बा-ताक़त और बा-इल्म होना ज़रूरी है, उसी तरह हुज़ूर ﷺ और औलिया-ए-कामिला का इल्म व तसर्रुफ़ शैतान से कहीं ज़्यादा ताक़तवर है ताकि वे उम्मत के ईमान की हिफ़ाज़त फ़रमा सकें।

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