कुरान - 36:6 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
لِتُنذِرَ قَوۡمٗا مَّآ أُنذِرَ ءَابَآؤُهُمۡ فَهُمۡ غَٰفِلُونَ

Transliteration: (Litunzira qawmam maaa unzira aabaaa'uhum fahum ghaafiloon)

ताकि आप उस क़ौम को डराएं जिनके बाप-दादा को नहीं डराया गया था, पस वे बे-ख़बर हैं [6]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 6

"ताकि आप उस क़ौम को डराएं जिनके बाप-दादा को नहीं डराया गया था, पस वे बे-ख़बर हैं [6]!"

[6] दावते नबुव्वत का मक़सद और ज़माना-ए-फ़तरत

यहाँ दावते नबुव्वत के मराहिल और अहले अरब की हालत बयान की गई है:

  1. हुज़ूर ﷺ ने अपनी दावत का आग़ाज़ अपने ख़ानदान से फ़रमाया, फिर अपनी क़ौम और अहले अरब को दावत दी, और फिर पूरी दुनिया के लिए रहमत व नज़ीर बनकर आए। यहाँ दूसरे मरहले (क़ौमे अरब) का ज़िक्र है।
  2. हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम के बाद अरब में सदियों तक कोई साहिबे किताब पैग़ंबर नहीं आया था (यह ज़माना 'फ़तरत' कहलाता है), जिसकी वजह से लोग हक़ से बे-ख़बर और शिर्क व जहालत की ग़फ़लत में मुब्तला हो चुके थे।
  3. हुज़ूर ﷺ की अज़ीम शान यह है कि आपने ऐसी क़ौम की काया पलट दी जो सदियों से अख़लाक़ी व रूहानी तौर पर तबाह हो चुकी थी, और उन्हें दुनिया का इमाम बना दिया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now