Transliteration: (Allazee ja'ala lakum minash shajaril akhdari naaran fa-izaaa antum minhu tooqidoon)
"वही जिसने तुम्हारे लिए सब्ज़ दरख़्त से आग पैदा फ़रमाई, तो देखो! तुम उससे आग सुलगाते हो [118]!"
अल्लाह तआला ने अपनी कु़दरते कामिला की ऐसी मिसाल दी जो अक़्लों को हैरान कर देती है। अरब में मरख़ और अफ़ार नामी दो हरे-भरे दरख़्त होते हैं, जिनकी हरी शाख़ों से पानी टपक रहा होता है। जब उन दोनों हरी शाख़ों को आपस में रगड़ा जाता है, तो उनसे शो'ले और आग भड़क उठती है।
जो ज़ात पानी और आग जैसी दो मुतज़ाद (उल्टी) चीज़ों को एक ही सब्ज़ शाख़ में जमा करने पर क़ादिर है, क्या वह बोसीदा हड्डियों में दोबारा ज़िंदगी की रूह फूँकने पर क़ादिर नहीं?
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