कुरान - 36:82 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

82
إِنَّمَآ أَمۡرُهُۥٓ إِذَآ أَرَادَ شَيۡـًٔا أَن يَقُولَ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ

Transliteration: (Innamaa amruhooo izaaa araada shai'an ai-yaqoola lahoo kun fa-yakoon)

उसका काम तो बस यही है कि जब वह किसी चीज़ का इरादा फ़रमाता है, तो उससे फ़रमाता है: "हो जा" [120], और वह फ़ौरन हो जाती है [121]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 82 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 82

"उसका काम तो बस यही है कि जब वह किसी चीज़ का इरादा फ़रमाता है, तो उससे फ़रमाता है: 'हो जा' [120], और वह फ़ौरन हो जाती है [121]!"

[120] लफ़्ज़े "कुन" (हो जा) का हक़ीक़ी मफ़हूम

"कुन" (हो जा) से मुराद अल्लाह तआला का इरादा और फ़ैसला है। अल्लाह तआला जब किसी चीज़ को वजूद बख़्शना चाहता है, तो उसे किसी सामान, औज़ार, मेहनत या मुद्दत की हाजत नहीं होती, बल्कि उसके इरादा फ़रमाते ही वह चीज़ फ़ौरन वजूद में आ जाती है। यह किसी ज़बानी हर्फ़ की मोहताजी नहीं बल्कि शान-ए-क़ुदरत का इज़हार है।

[121] कु़दरते मुतलक़ा और फ़ौरी तकवीन

अल्लाह की क़ुदरत ऐसी कामिल है कि पूरी कायनात को दोबारा ज़िंदा करना उसके एक हुक्म का ताबे है। न कोई देर, न कोई रुकावट।

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