कुरान - 10:98 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

98
فَلَوۡلَا كَانَتۡ قَرۡيَةٌ ءَامَنَتۡ فَنَفَعَهَآ إِيمَٰنُهَآ إِلَّا قَوۡمَ يُونُسَ لَمَّآ ءَامَنُواْ كَشَفۡنَا عَنۡهُمۡ عَذَابَ ٱلۡخِزۡيِ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَمَتَّعۡنَٰهُمۡ إِلَىٰ حِينٖ

Transliteration: (Falaw laa kaanat qaryatun aamanat fa nafa'ahaaa eemaanuhaaa illaa qawma Yoonusa lammaaa aamanoo kashafnaa 'anhum 'azaabal khizyi fil hayaatid dunyaa wa matta'naahum ilaa heen)

फिर कोई ऐसी बस्ती क्यों न हुई जो ईमान लाई हो और उसके ईमान ने उसे लाभ पहुँचाया हो, सिवाय यूनुस की क़ौम के? जब वे ईमान ले आए, तो हमने सांसारिक जीवन में उनसे अपमान का अज़ाब टाल दिया और उन्हें एक निर्धारित समय तक जीवन का सुख भोगने दिया। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 98 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 98 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] सूरह यूनुस का केंद्रीय सबक़: क़ौम-ए-यूनुस की तौबा

इतिहास में किसी क़ौम पर जब अज़ाब के लक्षण प्रकट हो गए, तो उनकी तौबा क़ुबूल नहीं हुई, केवल हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) की क़ौम (नीनवा के निवासी) इसका अपवाद रही। जब हज़रत यूनुस अपनी क़ौम से नाराज़ होकर चले गए और अज़ाब के काले बादल छाने लगे, तो पूरी क़ौम ने अपने गुनाहों से सच्ची तौबा की, जंगलों में निकलकर रो-रो कर अल्लाह से माफ़ी मांगी। अल्लाह ने उनकी सच्ची तौबा को क़ुबूल फ़रमाकर अज़ाब टाल दिया। यह आयत सिखाती है कि सच्ची तौबा से अल्लाह का ग़ज़ब भी टल जाता है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now