Transliteration: (Falaw laa kaanat qaryatun aamanat fa nafa'ahaaa eemaanuhaaa illaa qawma Yoonusa lammaaa aamanoo kashafnaa 'anhum 'azaabal khizyi fil hayaatid dunyaa wa matta'naahum ilaa heen)
इतिहास में किसी क़ौम पर जब अज़ाब के लक्षण प्रकट हो गए, तो उनकी तौबा क़ुबूल नहीं हुई, केवल हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) की क़ौम (नीनवा के निवासी) इसका अपवाद रही। जब हज़रत यूनुस अपनी क़ौम से नाराज़ होकर चले गए और अज़ाब के काले बादल छाने लगे, तो पूरी क़ौम ने अपने गुनाहों से सच्ची तौबा की, जंगलों में निकलकर रो-रो कर अल्लाह से माफ़ी मांगी। अल्लाह ने उनकी सच्ची तौबा को क़ुबूल फ़रमाकर अज़ाब टाल दिया। यह आयत सिखाती है कि सच्ची तौबा से अल्लाह का ग़ज़ब भी टल जाता है।
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