कुरान - 6:74 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

74
۞وَإِذۡ قَالَ إِبۡرَٰهِيمُ لِأَبِيهِ ءَازَرَ أَتَتَّخِذُ أَصۡنَامًا ءَالِهَةً إِنِّيٓ أَرَىٰكَ وَقَوۡمَكَ فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٖ

Transliteration: (Wa iz qaala Ibraaheemu li abeehi Aazara a-tattakhizu asnaaman aalihatan inneee araaka wa qawmaka fee dalaalim mubeen)

और [याद करो] जब इब्राहीम ने अपने पिता [149] आज़र से कहा, क्या तुम मूर्तियों को इला‍ह (माबूद) बनाते हो? निःसंदेह, मैं तुम्हें और तुम्हारी क़ौम को खुली गुमराही में पाता हूँ [150] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 74 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-अनआम – आयत 74

✅ [149] अपने पिता से चिंता और स्पष्टता के साथ संबोधन

इस आयत में ज़िक्र है कि हज़रत इब्राहीम عليه السلام ने अपने पिता आज़र से बात करते हुए उनकी बुत-परस्ती पर सवाल उठाया। उनका अंदाज़ चिंता और हिम्मत दोनों को दर्शाता है — अदब के साथ लेकिन दृढ़ता से। यह दिखाता है कि पैग़म्बरी का फ़र्ज़ है कि अपने घरवालों को भी हक़ की दावत दे, और ईमान के मामलों में कोई समझौता न करे।

✅ [150] क़ौम की गुमराही को खुलकर बयान करना

हज़रत इब्राहीम عليه السلام ने साफ़ शब्दों में कह दिया कि उनके पिता और उनकी क़ौम ख़ुली गुमराही में हैं। बुत-परस्ती, जो न अक़्ल पर आधारित है और न इलाही दलील पर, उसे ख़ुला गुमराह होना कहा गया। यह अंदाज़ बताता है कि नबी को चाहिए कि वह झूठ को बेबाक़ी से उजागर करे, चाहे वह समाज में कितना ही रचा-बसा क्यों न हो।

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