कुरान - 31:33 सूरह लुक़मान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ٱتَّقُواْ رَبَّكُمۡ وَٱخۡشَوۡاْ يَوۡمٗا لَّا يَجۡزِي وَالِدٌ عَن وَلَدِهِۦ وَلَا مَوۡلُودٌ هُوَ جَازٍ عَن وَالِدِهِۦ شَيۡـًٔاۚ إِنَّ وَعۡدَ ٱللَّهِ حَقّٞۖ فَلَا تَغُرَّنَّكُمُ ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَا وَلَا يَغُرَّنَّكُم بِٱللَّهِ ٱلۡغَرُورُ

Transliteration: (Yaaa ayyuhan naasuttaqoo Rabbakum wakhshaw Yawmal laa yajzee waalidun 'anw waladihee wa laa mawloodun huwa jaazin 'anw waalidihee shai'aa; innaa wa'dal laahi haqqun falaa taghurran nakumul hayaatud dunyaa wa laa yaghur rannakum billaahil gharoor)

ऐ लोगो! अपने रब से डरो [72] और उस दिन का ख़ौफ़ करो जिस दिन न कोई बाप अपने बेटे के काम आएगा और न कोई बेटा अपने बाप को कुछ फ़ायदा पहुंचा सकेगा [73]; बेशक अल्लाह का वादा सच्चा है [74], पस दुनियावी ज़िंदगी तुम्हें हरगिज़ धोखे में न डाले [75], और न वह बड़ा धोखेबाज़ (शैतान) तुम्हें अल्लाह के बारे में धोखे में रखे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह लुक़मान आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह लुक़मान तफ़सीर - आयत 33

"ऐ लोगो! अपने रब से डरो [72] और उस दिन का ख़ौफ़ करो जिस दिन न कोई बाप अपने बेटे के काम आएगा और न कोई बेटा अपने बाप को कुछ फ़ायदा पहुंचा सकेगा [73]; बेशक अल्लाह का वादा सच्चा है [74], पस दुनियावी ज़िंदगी तुम्हें हरगिज़ धोखे में न डाले [75], और न वह बड़ा धोखेबाज़ (शैतान) तुम्हें अल्लाह के बारे में धोखे में रखे।"

[72] तक़वे की आम दावत

यह ख़िताब मोमिन और काफ़िर दोनों से है। काफ़िरों के लिए यह ईमान लाने और अपनी इस्लाह करने की दावत है, जबकि मोमिनीन के लिए ईमान पर साबित-क़दम रहने, गुनाहों से बचने, और नेक आमाल करने की ताकीद है। यह आयत तक़वा और ख़ौफ़-ए-ख़ुदा को अपनाने की तालीम देती है।

[73] क़यामत के दिन बेबसी

यह आयत उस दिन की ख़ौफ़नाकी से डराती है जब ख़ून के रिश्ते भी काम नहीं आएंगे। उस दिन न बाप बेटे को बचा सकेगा और न बेटा बाप के काम आ सकेगा। यह ख़ास तौर पर काफ़िरों के हक़ में है, क्योंकि मोमिनीन के हक़ में अल्लाह तआला नेक बंदों के आमाल और शफ़ाअत से दूसरों को फ़ायदा अता फ़रमाएगा—जैसा कि दूसरी आयात से साबित है।

इसकी मिसालें हैं:

  • नेक वालिदैन का अपनी औलाद को और औलाद का वालिदैन को नफ़ा पहुँचाना

  • मोमिनों के ना-बालिग़ बच्चों का वालिदैन के ईमान की बिना पर जन्नत में दाख़िला

  • ईसाल-ए-सवाब, ज़कात और सदक़ात से आख़िरत में नफ़ा पहुँचना

  • अंबिया, शुहदा, उलेमा और औलिया-ए-किराम (मुर्शिदीन) की शफ़ाअत

पस मोमिनों और काफ़िरों के अहकाम मुख़्तलिफ़ हैं—यह आयत मुनकिरीन की लाचारी को बयान करती है।

[74] क़यामत का सच्चा और अटल वादा

अल्लाह तआला याद दिलाता है कि उसका वादा बरहक़ है। क़यामत का दिन ज़रूर क़ायम होगा। ईमान वालों के लिए यह इनाम और रहमत का दिन होगा, जबकि काफ़िरों के लिए हसरत और पछतावे का दिन होगा।

[75] दुनियावी ज़िंदगी का फ़रेब

यह आयत एक बेदारी का पैग़ाम है: यह फ़ानी दुनिया तुम्हें अल्लाह से ग़ाफ़िल न करने पाए। इस चंद रोज़ा ज़िंदगी को हमेशा की ज़िंदगी समझ लेना बहुत बड़ा धोखा है।

ताहम अंबिया और औलिया की दुनियावी ज़िंदगी अलग होती है—उनकी ज़िंदगी आख़िरत की तैयारी और नेकियों से भरपूर होती है। यह तंबीह ख़ास तौर पर हमारे जैसे माली दुनिया में खोए हुए लोगों के लिए है, जो अक्सर हक़ीक़ी और दायमी आख़िरत को भुला बैठते हैं।

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